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Sunday 23 September 2018
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मायावती को झटका, सतीश मिश्र की बहन भाजपा में शामिल

मायावती को झटका, सतीश मिश्र की बहन भाजपा में शामिल

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी बृजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्या झटके से अभी उबर भी नहीं पायी थी कि पार्टी सुप्रीमो मायावती के खासमखास सतीश चंद्र मिश्र की बहन दिव्या मिश्रा ने बसपा से नाता तोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सबको चौंका दिया है। हालाँकि दल बदल की सियासत में यह मायावती से ज्यादा बड़ा झटका सतीश मिश्र के लिए माना जा रहा है।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र की बहन दिव्या मिश्रा बसपा शासनकाल में राज्य समाज कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस बीच भरी संख्या में दूसरे दलों के नेताओं भाजपा में शामिल होने पार्टी कैडर में भी विरोध की चिंगारी सुलगाने लगी। इस असंतोष को रोकना भाजपा के लिए नयी चुनौती बन गयी है। बसपा में बड़ा नाम और ब्राहम्णों के नेता सतीश चंद्र मिश्रा की चचेरी बहन के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा ने एक बार फिर बसपा में हड़कंप कर दिया है। लोकसभा में एक भी सीट ना जीतने के बाद बसपा के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वर्ष २००७ में प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती ने सतीश चंद्र मिश्रा की बहन आभा अग्निहोत्री को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष और डॉ. दिव्या मिश्रा को राज्य समाज कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था। समझा जा रहा है कि इनका ठिकाना भी भाजपा ही होगी। भाजपा में दूसरे दलों से आ रहे नेताओं के बीच तमाम ऐसे नेता हैं जो टिकट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। भाजपा में कांग्रेस, बसपा और सपा छोड़कर तमाम नेता शामिल हो रहे हैं। कई ऐसे नेता हैं जिनके बारे में कयास लगाये जा रहे हैं कि वह भाजपा का जल्द ही दामन थाम सकते हैं। ऐसे में भाजपा में बाहर से आ रहे नेताओं को लेकर पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के रोष को रोकने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विशेष योजना बना रहा है। भाजपा इस बार पिछले बार के चुनाव की तुलना में कहीं अधिक सीट जीतने पर नजर बना रही है। ऐसे में पार्टी ने दूसरे दलों से आये ४० से अधिक नेताओं को टिकट देने की तैयारी कर रही है।
ऐसे में टिकटों के बंटवारे के समय उन नेताओं को वरीयता दी जाएगी जिनका जनाधार बड़ा है। उप्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपनी पूरी तैयारियों में जुटी है। लेकिन पार्टी के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है वह है प्रदेश में उम्मीदवारों को टिकटों का बंटवारा।



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