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Tuesday 18 September 2018
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आखिर ये घिनौना खेल क्यों और कब तक ?

आखिर ये घिनौना खेल क्यों और कब तक ?

डॉ नारंग तो इस देश के ऐसे नागरिक थे और ऐसे पेशे से थे जहाँ हिदू मुस्लिम सिख इसाई नहीं बल्कि इन्सान के लिए काम करना होता है. लेकिन वो लोग आखिर कौन हैं जिन्होंने उनकी हत्या के बाद उन्हें सिर्फ और सिर्फ हिन्दू बनाकर रख दिया । मेरे हिसाब से इसके लिए सिर्फ उनलोगों को ही दोष देना गलत होगा जिन्होंने डॉ नारंग को हिन्दू बनाया बल्कि उन्हें भी ध्यान में रखना होगा जिन्होंने अफज़ल को आतंकवादी से मुसलमान और रोहित वेमुला को एक छात्र से दलित बनाने में कोई कोर कसार नहीं छोडी ! आखिर कौन हैं ये लोग और कहाँ हैं ? जहाँ तक मैं समझ पाया हूँ ऐसी घटिया और घातक सोच रखने वाले और कही नहीं बल्कि हमारे आपके बीच के सैतान ही हैं जो सफ़ेद बगुले की भांति सोशल मीडिया और मंचों पर संत की भूमिका में दिखाई देते हैं लेकिन यदि ठीक से देखें तो इस दोगलेपन की शुरुआत तो इन सफेद्पोस नेताओं ने ही की थी हर आतंकी को मुस्लिम बताकर वो भी केवल बोट बैंक के लिए, सरवा विदित है की अफजल जैसे आतंकी को गुरु व शहीद बताने वाले सरकार बनाने लगे उनका गठजोड़ भी ऐसे लोगों से बना जिसकी कल्पना भी लोंगों को नहीं थी ! पहले आतंकी घटनाओं के बारे में ये कहा जाता रहा की आतंकी की कोई जात नहीं होती, किसी धरम को बदनाम न करें। लेकिन, यही लोग किसी आतंकी की सजा पर उसे मुस्लिम और किसी छात्र की आत्महत्या को दलित की हत्या बताकर घड़ियाली आंसू भी बहाने लगे। जरा ठीक से देखें तो ऐसे ही लोग मुस्लिम को अपने मतलब के लिए आतंकी भी साबित करते गए। ये सब वही कर रहे हैं, करते आ रहे हैं जिन्हें सत्ता पर काबिज़ रहना है या सत्ता तक पहुंचना है. आज जब डॉ नारंग की हत्या होती है तो उन्हें भी ये स्वार्थी तत्व सिर्फ हिन्दू बनाकर रख देते हैं एक डॉ जो केवल इंसान की सेवा में तत्पर रहा उसे भी एक दायरे में संकुचित कर दिया जाता है! हिन्दू मुस्लिम के बीच इंसानियत को आखिर यू ही कब तक बांटा जाता रहेगा आखिर कब इस बात की वकालत जोर पकड़ेगी की की हम आप हिन्दू-मुस्लिम बाद में हैं पहले इंसान हैं . याद रखिए, जब आग लगाई जाती है तो उसमें सिर्फ वही नहीं जलते, जिनके लिए लगाई जाती है, वे भी जल जाते हैं, जो आस पास होते हैं। इस आग की चपेट में अब सब आ चुके हैं, क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, क्या सवर्ण, क्या दलित। और इसके लिए सबसे अधिक दोषी जाति, धर्म की राजनीति करने वाले नेता और उसके नाम पर वोट देने वाली जनता है।

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