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Thursday 15 November 2018
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मूलभूत समस्याओं से जूझतेग्रामीणों पर भी ध्यान दें मुख्यमंत्री जी

मूलभूत समस्याओं से जूझतेग्रामीणों पर भी ध्यान दें मुख्यमंत्री जी
कानपुर देहात: गांव की असली तस्वीर तो गांवों में घूमने और ग्रामीणों से रूबरू होने के बाद ही नज़र आती है अभी हाल ही में संम्पन्न जिला पंचायत  के द्वतीय चरण चुनाव की रिपोरटिंग में जब मुझे कानपुर देहात का दौरा राजधानी लखनऊ से निकल कर करने का अवसर मिला तो देखने में आया की वी वी आई पी सीट  मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश अखिलेश यादव की धर्मपत्नी डिम्पल यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज़ के दर्ज़नो गांवों में अभी भी  समुचित विकास के अभाव के चलते  ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल पायी हैं. आज भी गांव के लोग बिजली, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, जल निकासी की आदि समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं ग्रामीणों को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल पा रहा है. कई ग्रामीणों के नाम बीपीएल सूची में नहीं जुड़ पाया है. असलात गंज जिला परिषद् के अंतर्गत आने वाले गांव उसरी , दांती , हंसपुर भगवन्तपुर , दहेलिया सहित कई गांव आज़ादी के ६८ सालों बाद भी बाद से बदतर जीवन जीने को विवश हैं यहाँ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे करीब २१ प्रत्यासियों में से लगभग  एक दर्ज़न प्रत्यासियों  से मैंने ग्रामीणों की इस बदतर जिन्दगी एवं खस्ताहाली  पर  जब सवाल किये तो ज्यादातर प्रत्याशियों  ने  जबाब में  अधिकारों एवं विकास निधि में पर्याप्त राशि नहीं मिल पाने की वजह से ही  पंचायत का अपेक्षित विकास नहीं होना बताया जब की उसरी और दांती तथा कहिन्जरी के ग्रामीणों से जब इस बावत बात की गयी तो उन्होंने यह बताया की जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान विकास कराने के तमाम दावे तो करते हैं किन्तु जब जीत जातें हैं तो क्षेत्र में झाँकने भी नहीं आते !
 पिछले जिला पंचायत सदस्य के बारे में यहाँ के ग्रामीणों का कहना था की लोगों के पैर छू छू कर हर घर से एक बोट के लिए गिडगिडाने के बाद जब इन महाशय को जीता दिया गया तो ये जीतने के बाद से क्षेत्र में कहीं भी किसी गांव में झाकने तक नहीं आये ग्रामीणों ने यह भी बताया की इस बार भी क्षेत्र बदलकर दूसरे जिलापंचायत से नटवर गीरी के जरिये चुनाव लड़ रहें हैं समाजवादी पार्टी के काफी पुराने एवं सक्रिय कार्यकर्ता वर्तमान में समाजवादी पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला पदाधिकारी अब्बास खान भी असालत गंज जिलापंचायत के चुनाव में बिना पार्टी के झंडे के साथ दिखे जब उनसे इन उपेक्षित गांवों के बारे में जानने की कोशिश की गयी उन्होंने बताया की यहाँ के लोकप्रिय नेता मौजूदा सरकार में मंत्री शिवकुमार बेरिया के प्रयासों  से   प्राप्त  इस जिला पंचायत  के कई गांवों में पीसीसी सड़कें, लिंक मार्गों के जीर्णोद्धार, सड़कों के  मरम्मत कार्य,  शौचालय निर्माण कार्य ,सैकड़ों गांवो में अलग-अलग इंडिया मार्का पाइप आदि लगवाए गएँ  है  बावजूद इसके ग्रामीणों की तमाम  समस्याएं अभी भी  है जिसका समाधान जनहित में आवश्यक है उसके लिए भी प्रयास किये जा रहे हैं !
बताते चलें की इस पंचायत में अधिकतर लोग कृषि कार्य पर आश्रित हैं. विजली और सिंचाई की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी होती है. पंचायत में उन गांवों में जहाँ  बिजली  है भी वहां की भी हालत ऊँट के मुह में जीरा वाली ही लोकोक्ति को चरित्राथ करती है अनियमित विद्युतआपूर्ति का सीधा असर किसानों पर पड़ता है और वे चाहकर भी फसलों आदि का सही उत्पादन तमाम लागत लगाने के बाद भी नहीं पा पाते. कई ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संयुक्त हस्ताक्षर का पत्र भेजकर ध्यानाकर्षण करने की गुहार भी लगायी है देखना यह है की क्या आज़ादी के ६८ सालों बाद भी बिजली पानी जैसी मूलभूत समस्यायों से जूझ रहे इन ग्रामीणों का पुरसाहाल होता है या नहीं ?

 




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