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Saturday 17 November 2018
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लखनऊ ग्रामीण क्षेत्र के एक भी शिक्षा मित्र का नहीं हुआ समायोज़न,आत्मदाह का मन बना रहे हैं शिक्षामित्र ?

लखनऊ ग्रामीण क्षेत्र के एक भी शिक्षा मित्र का नहीं हुआ समायोज़न,आत्मदाह का मन बना रहे हैं शिक्षामित्र      ?

लखनऊ !  प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जहाँ सरकार की छवि बेहतर बनाने के  लिए नित नयी नयी योजनाओं की शुरुआत कर एवं विकास कार्यों की शीर्ष अधिकारीयों के बीच समीक्षा बैठक कर सरकार की छवि को बेहतर बनाने के लिए दिन रात एक कर मिशन २०१७ को कामयाब करना चाह रहें हैं वहीँ कुछ अधिकारी उनके सारे किये धिये पर पानी फेरने पर आमादा हैं ! इसका जीता जगता उदाहरण है उनके नाक के नीचे राजधानी लखनऊ में ही कुछ अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में कोताही बरत  सरकार की छवि ख़राब करने से बाज़ नहीं आ रहे है ! बताते चलें की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  १६ जून को राजधानी लखनऊ में प्रदेश के उन शिक्षामित्रों से रूबरू होने जा रहे हैं जिन्हें द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के उपरान्त शिक्षा सहायक बनाया जा चुका है इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षामित्र भी भाग ले रहें हैं लेकिन प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलम यह है की  यहाँ ग्रामीण क्षेत्र के द्वितीय चरण के एक भी शिक्षामित्र को अभी तक जिला बेशिक शिक्षा अधिकारी द्वारा समायोजित ही नहीं किया गया है जिसके चलते यहाँ के सारे शिक्षामित्रों में  आक्रोष व्याप्त है ! बताते चले की इनमे सैकड़ों पुरुष व महिला शिक्षामित्र ऐसी हैं जो आत्महत्या कर लेने की बात कर रही हैं लेकिन लखनऊ बेशिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी केवल यही जबाब दे रहे है की रिक्तियां ही नहीं हैं तो समायोजन कैसे किया जाये ?

यही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े एक भी शिक्षामित्र का समायोजन न होने एवं उनमे बड़ते आक्रोष को देखते हुए सपा सरकार के चारों विधायक शारदा प्रताप शुक्ला , गोमती यादव,चंद्रा रावत, इंदल कुमार  भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर  २२ मई  को शिक्षामित्रों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए एवं शिक्षा मित्रों के समायोजन में देरी किये जाने के लिए बशिक शिक्षा अधिकारी द्वारा गोलमाल करने एवं कोताही बरतने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात कर शीघ्र ही शिक्षा मित्रों के समायोजन कराये जाने की बात कही ! इस दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से गायब रहे ! सपा विधायकों ने भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से गायब रहने पर भारी आक्रोष जताते हुए कहा की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जानबूझकर समायोजन में देरी कर रहे है ताकि सरकार की छवि ख़राब हो !  सपा विधायकों के सहानुभूति के चलते आक्रोशित शिक्षमित्रों ने प्रदर्शन बंद कर दिया किन्तु आश्चर्य जनक तो यह है की अभी तक एक हज़ार दो सौ अट्टारह शिक्षा मित्र जो की द्वितीय चरण का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा की गयी घोषणा व शासनादेश के मुताबिक दिसम्बर २०१४ तक सहायक अध्यापक बनने का सपना देख रहे थे उनके सपनो पर पानी फिर गया है !

एक भी शिक्षामित्र  जो की लखनऊ ग्रामीण क्षेत्र के हैं समायोजित नहीं किये गए हैं इधर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा शिक्षा सहायकों का वेतन चेक वितरण १६जून को किया जाना बताया जा रहा है  और आक्रोशित शिक्षमित्र लखनऊ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी  के कार्यालय का चक्कर लगाते हुए घूम रहे हैं ! बताया तो यह भी जा रहा है गर्मी के चलते कुछ महिला शिक्षमित्र घर आते समय चकराकर बेहोश  तक हो गयीं । समायोजन न होने से परेशां शिक्षामित्रों की हालत अति दयनीय हो चली है खासकर महिला शिक्षामित्रों की हालत बहुत ही ज्यादा नाज़ुक हालात में है महिलाये अब इसे  मानसिक उत्पीड़न बताते हुए आत्मदाह तक करने की बात कह रही हैं इधर इस बावत जब बेशिक शिक्षाधिकारी से दूरभाष पर वार्ता कर जानकारी चाही गयी तो उन्होंने पद न होने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड  लिया ! यह कहे जाने पर की ग्रामीण क्षेत्र के सभी सपा विधायक भी समायोजन चाह  रहे हैं फिर भी विलम्ब क्यों हो रहा है ? इस पर भी उन्होंने यही जबाब दिया की पद नहीं हैं , दूसरी तरफ शिक्षमित्रों की लीडरशिप करने वाले नेताओं का आलम यह है की वे अपनी अपनी नेतागीरी चमकाने में लगें हैं संगठन अपनी ढपली अपना राग अलापने में मशगूल हैं  किसी को भी इस बात की परवाह नहीं है की लखनऊ जो कि प्रदेश की राजधानी है जब यहाँ ही शिक्षामित्र समायोजित नहीं किये गए हैं और उनमे व्यापक आक्रोष है तथा आत्मदाह जैसी घटना को अंजाम देने की उनमें  सोच पनप रही है तो भला सरकार की इसमें कीर्तिगाथा होगी या किरकिरी यह एक यक्ष प्रश्न है ?  शायद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी अभी तक शिक्षा मित्रों के इस दर्द की गहराई को पूरी तरह नहीं समझ सके हैं या फिर शिक्षमित्रों के इस दर्द से उन्हें अवगत नहीं कराया गया है ! जब की बताया तो यह भी जा रहा है की जनता दरबार में दो – दो बार महिला शिक्षमित्रों ने मुख्यमंत्री जी से मिलकर अपनी पीड़ा का इज़हार करते हुए लखनऊ ग्रामीण क्षेत्र के एक भी शिक्षा मित्र के  समायोजन  न किये जाने की बात पत्र  देकर  अवगत करा दी हैं किन्तु बावजूद इसके अभी  तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है!  जिसके चलते शिक्षामित्रों में घोर निरासा व्याप्त है और आत्मदाह जैसी सोंच उनमे पनप  रही है ! इस बावत सपा विधायक शारदा प्रताप शुक्ला से जब बात की गयी तो उन्होंने कहा की वो आज भी शिक्षामित्रों के साथ खड़े हैं समायोजन हेतु शिक्षा मंत्री जी से भी वार्ता हुई है शीघ्र ही समायोजनकी कारवाही शुरू होगी ! इसमें कोई दो राय नहीं की  लगातार १३ सालों से मात्र 2 हज्जार और साढ़े तीन हज़ार के मानदेय से जीवन यापन कर रहे इन शिक्षमित्रों के समयोजन पर यदि अखिलेश सरकार ने समय रहते शीघ्र ध्यान न दिया तो संभव है की  उनके इस अच्छे काम पर भी लापरवाह अधिकारी पानी फेर देने में सफल रहें क्योंकि  कोई घटना यदि घटित हुई तो सरकार की किरकिरी होना तय है शायद इसी दिन का अधिकारी इंतज़ार भी कर रहे हैं ……… !

 



A group of people who Fight Against Corruption.