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Tuesday 13 November 2018
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कालेदिवस के रुप में मनाई गई आपातकाल की 44वीं वर्षगांठ

कालेदिवस के रुप में मनाई गई आपातकाल की 44वीं वर्षगांठ

लखनऊ विशेष संवाददाता । सत्ता और कुर्सी सदा बनाए रखने की नियत से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में 25 /26 जून सन 1975 को अर्धरात्रि देश में आपातकाल घोषित कर देश के बुद्धिजीवियों तथा अपने विरोधी राजनेताओ को मीसा- डी०आई०आर० जैसे काले कानूनों के अंतर्गत कारागारो में बंद कर  लोकतंत्र की हत्या कर अत्याचार की सारी सीमाएं तोड़ दी थी और नागरिकों के सभी संबैधानिक व मूल अधिकार पूरी तरह समाप्त कर दिए थे ,अखबारों पर सेन्सरशिप लागू कर दी थी किन्तु महलों के भीतर कुम्भकरणी नींद सोयी सरकार कों उखाड़ फेकने की कसम खा चुके लोकतंत्र सेनानी “हटे नहीं, डिगे नहीं, डटे रहे”  परिणाम  स्वरूूप लोकशक्ति और तानाशाह के मध्य हुए इस जबरदस्त संघर्ष में तानाशाह को मुंह की खानी पड़ी और अलोकतांत्रिक शक्तियों को धूल धूसरित करते हुए लोकतंत्र पुनः बहाल  हुआ ।

आज सूबे की राजधानी लखनऊ में लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के आव्हान पर प्रदेश के विभिन्न  जिलो  से राजधानी आये लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल  की 44वी वर्ष गांठ को काला दिवस के रूप में मनाते हुए ना केवल भव्य कार्यक्रम किया बल्कि अपने कार्यालय ओ सी आर से जीपीओ पार्क हजरतगंज स्थित गाँधी प्रतिमा तक कैंडिल मार्च भी किया ।

लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने लोकतंत्र सेनानियों के बीच आपातकाल के कालखंड को याद करते हुए कहा कि आज भी उन कालरात्रियों को याद करते तन बदन में सिहरन सी होने लगती है| तानाशाही सरकार ने “न अपील, न वकील, न दलील” के सिद्धांत पर आपातकाल का विरोध करने वाले समस्त राजनेताओ को जेल की काल कोठरियों में डाल दिया था, और अनेकों प्रकार की अमानवीय यातनाए देकर आन्दोलन को कमजोर करने का प्रयास किया, उन्होंने कहा कि जनता के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात कर तत्कालीन सरकार ने ब्रिटिश हुकूमत की बर्बरता को भी पीछे छोड़ जब लोकतंत्र का गला घोंटा तो लोकतंत्र सेनानी अधिनायकवाद के सहारे राजतंत्र की स्थापना के लिए खड़े हो गए।

लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के  राष्ट्रीय महासचिव चतुर्भुज त्रिपाठी ने आपात काल की यातनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अहिंसक आन्दोलन करके जेल जाने वाले लोगों को रात-रात भर बर्फ की सिल्लियों से बाँध कर लिटाना, नाखूनों में कील ठोकना, पंखो से उल्टा लटकाने जैसी ना जाने कितनी ही अमानवीय यातनाए लोकनायक जयप्रकाश तथा अन्य अनेको लोकतंत्र समर्थक राजनैतिक बंदियों को  दी गई| उन्होंने स्व० मोरारजी देसाई को बयालीसबां संविधान संशोधन (मूलाधिकार ख़त्म करने वाला) निरस्त करने का श्रेय देते हुए कहा कि अब कोई भी तानाशाह आपातकाल लगाने जैसी हरकत नहीं कर सकेेेगा  श्री त्रिपाठी ने कहा कि आपातकाल बुनियादी तौर पर फांसीवादी मानसिकता की देन  है| जबतक शस्त्र और शोषण रहेगा तब तक आपातकाल की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता| 1975 से लेकर 1977 तक की लड़ाई इस बात की साक्षी है कि आपातकाल जैसी परिस्थितियों में समाजवादी सोच के लोग ही सबसे आगे आते है उन्होंने कहा कि अलोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ लड़ना बुद्धिजीवियों, समाजवादी सोच के लोगो और लोकतंत्र रक्षकों की जिम्मेदारी है श्री त्रिपाठी ने बताया कि आपातकाल में लोकतंत्र के रक्षकों का मनोबल गिराने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की अमानवीय यातनाये दी गई, किसी के नाख़ून खीचें गये तो किसी के आंखों में मिर्च डाली गई किन्तु लोकतंत्र के रक्षक बर्बर तानाशाह के सामने ना झुके और ना ही टूटे जिसके परिणाम स्वरुप ना जाने कितने ही लोकतंत्र सेनानियों की कारागार के अंदर ही मृत्यु हो गई उन्ह्होंने  कहा कि सिंहासन को बचाने की नियत सेे  तत्कालीन सरकार ने देश में एमरजेंसी लगा दी और मनमाना शासन चलाने लगी, आपातकाल के दौरान कानून का राज़ ख़त्म हो गया और बर्तानिया सरकार से भी ज्यादा बर्बर यातनाए राजनैतिक बंदियों को दी उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान किये गए जनान्दोलनों और संघर्षो का ही परिणाम है कि देश में लोकतांत्रिक सरकारे शासन कर रही है|

लोकतंत्र सेनानी पी के त्रिपाठी ने  आपातकाल के उन उन्नीस महीनों को याद करते हुए कहा कि जेल के अंदर प्रतीत नहीं होता था कि आपातकाल का न्रसंश राज कभी ख़त्म होगा और अब हम लोग कभी जेल की काल कोठरियों से बाहर निकल पायेगे| लोकतंत्र रक्षकों के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा आपातकाल के दौरान हुए संघर्ष में समूचा देश जुड़ गया था, और वक्त साक्षी है कि अगर देश में कभी अलोकतांत्रिक शक्तियों ने सर उठाने की कोशिश की है तो इस देश का युवा इसी प्रकार उसका दमन करेगा| कार्यक्रम  का सफल संचालन करते हुए लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय महासचिव चतुर्भुज त्रिपाठी ने सेनानियों के प्रति केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा उदासीन रवैया अपनाये जाने की भर्त्सना करते हुए कहा कि प्रदेश की पूर्व सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के हितार्थ कई कदम उठाये किन्तु वर्तमान सरकार के कानून मंत्री आगरा में लोकतंत्र सेनानियों के हितार्थ  घोषणा तो करते हैै अमल में वही ढाक के तीन पात वाली लोकोक्ति ही चरित्रार्थ होती है       श्री त्रिपाठी ने लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भातिं सभी सुविधाए एवं सम्मान देंंने तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राण न्योछावर करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को शहीद का दर्जा देेंने और केेंद्र सरकार द्वारा जारी पत्र लोकतंत्र सेनााानियों हैतु सम्मानकोष स्थापित किये जाने की बात कही इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम मिलन मिश्रा,वैकुंठनाथ यादव,प्रहलाद मिश्रा,मुनिदेव शास्त्री,सोनेलाल यादव,प्रदेश सचिव प्रदीप दुबे,किसनलाल पारासर,माताप्रसाद तिवारी,मंगली प्रशाद मौर्या,जगजीवन सिंह यादव,अब्दुल सत्तार अंसारी,प्रमोद शुक्ला सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहे।

 



A group of people who Fight Against Corruption.


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