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Tuesday 13 November 2018
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क्राइम कंट्रोल के लिए यू पी पुलिसिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

क्राइम कंट्रोल के लिए यू पी पुलिसिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

लखनऊ. क्राइम कंट्रोल हेतु यूपी पुलिस ने थानों पर अतिरिक्त एसएचओ तैनात किए जाने का सर्कुलर जारी किया है। अब 1 थाने पर 3 और अतिरिक्त इंस्पेक्टर तैनात किए जाएंगे।ये लेटर डीजीपी मुख्यालय द्वारा जारी किया गया है जारी लेटर में कहा गया है कि इंस्पेक्टर प्रशासन, इंस्पेक्टर कानून व्यवस्था और इंस्पेक्टर अपराध की नियुक्ति की जाएगी।

 लेटर जो जरी किया गया उसमे लिखा है – प्रदेश के विभिन्न थाना क्षेत्रों में बढ़ रही पुलिस की चुनौतियों, उत्तरदायित्वों और कोर्ट द्वारा कानून व्यवस्था और अपराध के पृथकीकरण के संबंध में अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षकों द्वारा क्षेत्राधिकारी मुख्यालय के थानों पर प्रभारी निरीक्षक के सम्पूर्ण पर्यवेक्षण में अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (प्रशासन), अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (अपराध), अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (कानून व्यवस्था) नियुक्त किए जाएं।
इसी प्रकार क्षेत्राधिकारी मुख्यालय के थानों पर 1 और 3 अतिरिक्त निरीक्षक रैंक के अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
यदि प्रभारी निरीक्षक के अंतर्गत किन्हीं कारणों से 03 से कम निरीक्षक नियुक्त होते हैं तो प्रभारी निरीक्षक अपने पर्यवेक्षण में नियुक्त निरीक्षकों को अतिरिक्त कार्यभार दे सकते हैं।

किसकी क्या जिम्मेदारी

प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (प्रशासन) अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (कानून) अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (अपराध)
– थाने का भारसाधक अधिकारी तथा तीनों अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षकों और एसएसआई के कार्यों का पर्यवेक्षण करना। – जीपी लिस्ट, मालखाने के प्रबंधक में वरिष्ठ प्रभारी के साथ सहयोग। – थाना क्षेत्र से सम्बंधित कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी। – अपराध के संबंध में सभी मामलों की जिम्मेदारी।
– सभी आने जाने वाली डाक का सर्वेक्षण। – जनसुनवाई में सहयोग। – बीट पेट्रोलिंग, नाकाबंदी, बंदोबस्त जैसे कार्य। – सभी गंभीर अपराधों के घटनास्थल का निरीक्षण तथा पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करना।
– न्यायालय के प्रोसेस का क्रियान्वयन करना व कराना। – जनसंपर्क कार्य करना व कराना। – ट्रैफिक व्यवस्था। – चुनावी अपराधों के रोकथाम के लिए कार्ययोजना।
– गंभीर अपराधों के घटनास्थल का निरीक्षण। – प्रार्थनापत्रों का थाने के समस्त प्टॉफ में आवंटन की जिम्मेदारी। – एंटी रोमियो सेल की व्यवस्था। – साइबर क्राइम की विवेचना।
– अभियोगों का पंजीकरण करना व कराना। – थाना परिसर और पुलिसकर्मी आवास का अनुरक्षण, परिक्षण और मरम्मत। – जूलूस, धरना, प्रदर्शन, मेला, धार्मिक आयोजन और त्यौहारों पर शांति व्यवस्था। – लूट, डकैती के साथ-साथ हत्या और अन्य गंभीर जघन्य अपराधों की तत्काल सूचना भेजना।

क्या कहा पूर्व डीजीपी ने- पूर्व डीजीपी एके जैन ने बताया, यह व्यवस्था सीओ सर्किल के मुख्यालय थानों पर लागू होगी। इससे प्रमुख इंस्पेक्टर पर पड़ने वाले भार जैसे की लॉ एंड ऑर्डर, प्रशासन और क्राइम को अलग-अलग बांट दिया जाएगा जिससे की समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलेगी। लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सीओ और एडिशनल एसपी की भूमिका अहम हो गई है क्योंकि एक ही रैंक के 4 इंस्पेक्टर के तैनात होने पर गुटबाजी और जवाबदेही को लेकर टकराव हो सकता है।बता दें कि यूपी में कुल 1567 थाने हैं और 5 हजार के करीब इंस्पेक्टर हैं।



A group of people who Fight Against Corruption.


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