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Tuesday 25 September 2018
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दलित संगठनों द्वारा किये गए भारत बंद में हिंसा,करीब 14 लोगों की मौत, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक मौतें

दलित संगठनों द्वारा किये गए भारत बंद में हिंसा,करीब 14 लोगों की मौत, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक मौतें

नई दिल्ली ! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों का सोमवार को भारत बंद का असर देश के 12 राज्यों में देखा गया। इनमें से उन राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसा और प्रदर्शन देखने को मिला, जहां इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं। इनमें मध्यप्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। इनके अलावा पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक झड़प हुईं। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में एक की मौत हो गई। उधर, पंजाब में बंद के चलते सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है।

सबसे ज्यादा असर एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़में, इस साल यहां होने हैं चुनाव…

राज्य के करीब 14 से ज्यादा जिलों में विरोध-प्रदर्शन देखा गया। ग्वालियर, भिंड और मुरैना में भारी हिंसा हुई। ग्वालियर में हिंसा के दौरान तीन लोग मारे गए। टोल प्लाजा में तोड़फोड़ की गई। कई जगह सड़क पर वाहन जलाए गए। पांच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया। वॉटसऐप पर गलत खबरें और अफवाहें ना फैलें इसके लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया। प्रदेश के इंदौर, सिवनी, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ और जबलपुर में बंद का मिला-जुला असर रहा।ग्वालियर में 2, भिण्ड में 2, डबरा में 1और मुरैना में 1की मौत हुई।

राजस्थान के अलवर में एक की मौत, महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं

अलवर जिले के खैरथल इलाके हुई हिंसा में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। बाड़मेर में दलित संगठनों और करणी सेना के बीच झड़प हो गई, जिसमें 25 लोग जख्मी हो गए। भरतपुर में महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करती दिखीं। अलवर में एक मकान में आग लगाने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में आग लगा दी। पुष्कर में कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई।

सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला दिया था ?

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं।

तुरंत गिरफ्तारी नहीं। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी।
  एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी।

अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे।

एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट बताती है कि देशभर में जातिसूचक गाली-गलौच के 11,060 शिकायतें दर्ज हुईं। जांच में 935 झूठी पाई गईं।

दलित संगठनों की क्या मांग है?

संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू हों।

सरकार ने क्या किया?

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए एक याचिका दायर की। कोर्ट ने सोमवार को फौरन सुनवाई से मना कर दिया।
देश में एससी/एसटी की आबादी 20 करोड़ और लोकसभा में इस वर्ग से 131 सांसद (एससी के 84 और एसटी के 47) हैं। इस बड़े वर्ग से जुड़े इस मामले से हर दल के हित हैं। इसी वजह से कांग्रेस समेत बड़े विपक्षी दलों ने उसके आंदोलन को समर्थन दिया। भाजपा के सबसे ज्यादा 67 सांसद इसी वर्ग से हैं।

क्यों एससी/एसटी अहम?
राज्य में इस साल चुनाव हैं। विधानसभा की 200 सीट में से एससी कोटे की 33 और एसटी की 25 सीटें हैं। पिछले तीन चुनावों में टिकट बंटवारे से लेकर सरकार गठन तक एससी-एसटी और जाटों का ही बोलबाला रहा है। कांग्रेस और भाजपा ने 95 से ज्यादा सीटों पर इन्हीं समुदाय के कैंडिडेट्स मैदान में उतारे। बाकी आधी सीटों का राजपूत, ब्राह्मण, मुस्लिम, गुर्जर और दूसरी जातियों को अहमियत दी गई है।

छत्तीसगढ़ में आधी सीटें एससी/एसटी असर वाली

प्रदेश में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई समेत राज्य में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मेडिकल स्टोर को छोड़कर करीब-करीब सभी बाजार बंद नजर आए। हालांकि, राज्य से हिंसा की कोई खबर नहीं मिली।

कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए।

क्यों हैं एससी/एसटी अहम?

छतीसगढ़ में कुल 90 सीटें हैं। इनमें से एससी के लिए 10 और एसटी के लिए 29 सीटें रिजर्व हैं। अगर देखा जाए तो करीब आधी सीटों पर एससी/एसटी का असर है।

बाकी 7 राज्यों में क्या रहे हालात?

पंजाब: सदा-ए-सरहद बस रोकी, 10वी-12वीं की परीक्षाएंटालीं

सभी स्कूल-कॉलेज, यूनिवर्सिटी और बैंक बंद रहे। सीबीएसई की 10वी-12वीं की परीक्षाएं टाली गईं। रात 11 बजे तक बसें और इंटरनेट बंद रहने के आदेश दिए गए। सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया।

दिल्ली और लाहौर के बीच चलने वाली सदा-ए-सरहद बस सेवा भी बाधित हुई। पाकिस्तान जाने वाली बस को पहले पंजाब के सरहिंद में रोका गया। बाद में इसे पटियाला-संगरूर के रास्ते लाहौर रवाना किया। वहीं, दिल्ली आने वाली बसों को अमृतसर में रोक दिया गया।

बिहार: एंबुलेंसफंसने से एक बच्चे की मौत

मधुबनी, आरा, भागलपुर और अररिया में ट्रेनें रोकी गईं। मोतिहारी में तोड़फोड़ की गई।

वैशाली में प्रदर्शनकारियों ने एक एंबुलेंस को रोक लिया। मां गुहार लगाती रही, लेकिन जाम में फंसे रहने के चलते एक नवजात की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश: दोकी मौत, 3 जख्मी

यूपी के मुजफ्फरनगर में एक शख्स की मौत हो गई। वहीं, तीन जख्मी हो गए। मेरठ, गोरखपुर, सहारनपुर, हापुड़, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मथुरा और आगरा समेत कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया।

मथुरा, हापुड़ और मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ करने के साथ वाहनों और पुलिस थाने में आग लगाई। आग बुझाने पहुंची दमकल की टीम पर पथराव हुआ।

बिजनौर में एक बीमार व्यक्ति की रैली के दौरान फंसने से मौत गई।

झारखंड:जबरन बाजार बंद कराए,ट्रेनें रोकी गईं

सड़कों पर जाम लगाया गया। कई जगहें ट्रेनें रोकी गईं। प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए। रांची में पुलिस पर पथराव हुआ। जमशेदपुर में एक ट्रक में आग लगा दी गई।

गुजरात:अहमदाबाद में बसों पर पथराव, राजकोट में भी तोड़फोड़

अहमदाबाद में बस सर्विस को बंद करना पड़ा। कई जगह पथराव किया गया। आंदोलनकारियों ने पाटन, हिम्मतनगर, थराद, नवसारी, भरूच, जूनागढ़, धानेरा, भावनगर, जामनगर, अमरेली, तापी, साणंद के अलावा राज्य के और भी इलाकों में रैलियां निकाली गईं।
कच्छ जिले के गांधीधाम शहर में सरकारी वाहन पर पथराव किया गया। जूनागढ़, राजकोट, राजुला, चोटिला के अलावा दूसरे इलाकों से भी आगजनी और पथराव की खबरें आईं।
सौराष्ट्र, कच्छ और राजकोट में भी आगजनी-तोड़फोड़ की गई।

हरियाणा:पुलिस ने की फायरिंग, पथराव में 50 पुलिसकर्मी जख्मी

नेशनल हाइवे -1 बंद कर दिया गया। कैथल में प्रदर्शनकारी रोडवेज डिपो में घुस गए। यहां टिकट काउंटरों पर तोड़फोड़ की गई। एक ट्रेन इंजन पर पथराव किया गया। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। यहां पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प। पुलिस फायरिंग में 10 लोग घायल हुए। पथराव में 50 पुलिसकर्मी जख्मी हुए।

ओडिशा: प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोकीं।

राहुल गांधी ने कहा-दलितों को सलाम, संघ का पटलवार

राहुल ने ट्वीट में कहा- “दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना आर एस एस और बी जे पी  के डी एन ए  में है। जो इस सोच को चुनौती देता है उसे वे हिंसा से दबाते हैं। हजारों दलित भाई-बहन आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं। हम उनको सलाम करते हैं। उधर, संघ ने पटलवार करते हुए कहा कि कुछ लोग आरएसएस के खिलाफ जहरीला कैम्पेन चला रहे हैं। कानून में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संघ से कोई लेना देना नहीं है।

 



A group of people who Fight Against Corruption.


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