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Friday 20 July 2018
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लखनऊ की रामलीला जहाँ मुस्लिम कलाकार करते हैं आज भी मंचन

लखनऊ की रामलीला जहाँ मुस्लिम कलाकार करते हैं आज भी मंचन

कहना न होगा मौजूदा समय में जहाँ सियासतदां लोग स्वार्थहित में लिप्त येन-केन-प्रकारेण सत्ता हथियाने के लिए जातिगत कार्ड खेल एक दूसरे के बीच  मतभेद पैदा कर समाज को विघटित करने पर आमादा है वहीं इन सियासतदानों के मंसूबों से इतर देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आज भी जातिगत भावना से ऊपर उठ हिन्दू-मुस्लिम कंधे से कन्धा मिला इकजहती व भाईचारे का पैगाम देने में पीछे नही हैं !राजधानी लखनऊ में ही  बीकेटी की ऐतिहासिक रामलीलाहिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनी हुई है इस रामलीला की खसियात यह है कि इसमें रामकथा का मंचन ज्यादातर मुस्लिम कलाकारों के द्वारा ही किया जाता है। बतया जाता है इस  ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत 1972 में ग्राम पंचायत रूदही के तत्कालीन प्रधान मैकूलाल यादव और बीकेटी कस्बे के प्रसिद्व चिकित्सक डॉ मुजफ्फर हुसैन ने  की  थी। इसके बाद मैकूलाल यादव के पुत्र विदेश पाल यादव व मुजफ्फर अली के पुत्र शहजाद अहमद ने इस परंपरा को आगे बढाया। 2010 में नगर पंचायत बीकेटी के गठन के बाद इस रामलीला का आयोजन नगर पंचायत सुमन रावत व उनके पति गढ़ेश रावत देख रहें हैं  रामलीला का शुभारंभ 30 सिंतबर को शिव बारात के साथ हुआ जो आज  सोमवार  को समाप्त हुआ यहाँ एक अक्तूबर को धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। सोमवार को राम-रावण युद्ध के बाद देर शाम 40 फुट के पुतले के दहन के साथ इस ऐतिहासिक रामलीला का भाबी समापन हो गया। इस रामलीला को 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा राष्ट्रीय एकता के लिए पुरुस्कृत भी किया जा चुका है रामलीला में साबिर अली खान 1975 से मंचन की जिम्मेदारी संभाल रहे है। इनके पुत्र सलमान राम, अरबाज लक्ष्मण, शेर खान जनक, नाती साहिल बचपन के राम की भूमिका निभाते है। रावण की भूमिका कई सालों तक साबिर अली के भाई नसीम खान के द्वारा निभाई गई। लेकिन तीन साल पहले बीमारी के चलते अब रावण की भूमिका पवन गुप्ता द्वारा निभाई जा रही है।




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