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Tuesday 24 October 2017
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गरीबों की बातें करने वाले आमीरजादों को आइना दिखा रहा है एथिलीट अजीत वर्मा का यह वीडियो

गरीबों की बातें करने वाले आमीरजादों को आइना दिखा रहा है एथिलीट अजीत वर्मा का यह वीडियो

देश में नोट बंदी के बाद से आम आदमी के आर्थिक हालात  कैसे बिगड़े हैं इसका अंदाजा उस गरीब मजदूर से बेहतर कौन समझ सकता है जो  दिहाड़ी पर काम की तलास में भटक रहा है और उसे काम तक नहीं मिल पा रहा है जिससे  वो अपना व अपने बच्चों को चटनी रोटी दे सके कपड़े और छत की तो बात ही छोडिये, महंगाई में लगातार होती वृद्धि आम लोगों की कमर तोड़े डाल रही है और सरकार है की उसे हर क्षेत्र में विकास की गंगा बहती दिख रही है. सरकार के नुमाइंदे नोट बंदी को  किसान, मजदूर, गरीब के हितों की रक्षा करने वाला कदम बता रहें हैं. दिनभर काम की तलाश में भटकने के बाद जब किसी को  काम या दिहाड़ी नहीं मिलती तब उस फुर्सत में भारत का एक आम आदमी क्या करता है इसे आज  पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अजीत वर्मा द्वारा सोसल मीडिया पर वायरल किये गए इस वीडिओ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है जिसके माध्यम से न उन्होंने सच का आइना सरकार को दिखाया है बल्कि मीडिया वालों को भी यह सन्देश देना चाहा है की असली तस्वीरों को कैमरे में क्यों नहीं कैद कर पाती मीडिया ….?

वैसे इस वीडिओ को सरकार के उन नुमाइंदों को  जरूर देखना चाहिए जो रातो दिन विकास का ढिंढोरा और नोट बंदी के फायदे को गिनाते नहीं थकते हैं वो कहते हैं आप देश में चारों तरफ घूमकर देखिए कहीं हताशा-निराशा और बेरोजगारी परेशानी का वातावरण नहीं है  विकास दर रफ़्तार में हैं यकीनन इस तरह की बात कर रहे अमित शाह के आस-पास का माहौल जरूर विकासवादी नज़रिये से भरा होगा वरना  दुनियाभर के आर्थिक विशेषज्ञ  भारत के चरमराई आार्थिक व्यवस्था पर चिंताएं व्यक्त ना कर रहे होते क्यों कि देश की असलियत तो कुछ और ही बंया कर रही है।  तभी तो पूर्व वित्त मंत्री यसवंत सिन्हा  ने बेखौफ होकर कहा कि ‘वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था का ‘कबाड़ा’ कर दिया .यशवंत सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी करीब से देखा है। ऐसा लगता है कि उनके वित्त मंत्री ओवर-टाइम काम कर रहे हैं जिससे वह सभी भारतीयों को गरीबी को काफी नजदीक से दिखा सकें.

 देश के  अमीरजादों के साथ खड़े होकर गरीबों की बात करने वालों को पूर्व अंतर्राष्ट्रीय एथिलीट अजीत वर्मा  का सोशल मीडिया पर डाला गया यह वीडियो आइना दिखा रहा है वीडियो में देखा जा सकता है  कि एक गरीब मजदूर  को जब दिनभर काम तलाश करने के बावजूद  काम नहीं मिलता तो वह अपनी पुरानी उधड़ी हुई पतलून को सिलने में लग जाता है  उसी समय अजीत वर्मा ने उससे बात करते हुए यह वीडियो बना लिया। वह व्यक्ति वीडियो में बताता है कि मैं कोई भिखारी नहीं हूं। आज कहीं काम नहीं मिला इसलिए अपनी उधड़ी पतलून  सीने लगा हूं।यह वीडिओ आज की हकीकत का सरकार व समाज को आइना दिखा देता है .
ऐसे द्रश्यों को देखने के बाद एक बार  फिर लोगों  के दिलो दिमाग में वो वादे ताज़ा हो जाते  है जिसका उन्हें सपना दिखया गया था वो चाहे विदेश से काला धन वापस लाने का  वादा हो जो की  भाजपा का बड़ा चुनावी मुद्दा रहा था  या  हर खाते में 15 लाख रुपए दिए जाने का वादा, जिसे शायद आम आदमी को  भूलना भी मुश्किल है.कहना ना होगा विदेशों से काला धन लाने में मोदी सरकार को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है. जब की इसके लिए मोदी सरकार 2015 में ब्लैक मनी ‘अन डिसक्लोज्ड फॉरेन इंकम एंड एसेट्स एंड इम्पोजिशन ऑफ टैक्स’ अधिनियम लाई. इसमें सीमित समय में विदेशी आय और संपत्ति घोषित करने का मौका दिया गया था. यह कानून भी नक्कारखाने में तूती की आवाज ही साबित हुआ.काला धन कब तक आ पायेगा  इसका इंतज़ार आज भी  सबको है. रिजर्व बैंक इस जानकारी पर गहन चुप्पी साधे हुए है. जब की राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नोटबंदी से मोदी को राजनीतिक फायदा हुआ है.


A group of people who Fight Against Corruption.


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