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Tuesday 24 October 2017
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स्वच्छता बनाम सेल्फी

स्वच्छता बनाम सेल्फी

झाड़ू और सेल्फी आजकल एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं इन दिनों तो  फेसबुक और ट्विटर पर झाड़ू लगाने वालों की जैसे बाढ़ सी आई हुई है कल तक जिस झाड़ू को लोग छूने से कतराते थे उसी झाडू को  आज नेता अभिनेता खिलाड़ी और साधू संत से लेकर आम आदमी तक हाथों में पकड़कर खुद को गौरवान्वित  महसूस कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनने की उन हिस्सों में सबसे  ज्यादा कोशिश हो रही है जहाँ मीडिया सरलता से सुलभ  है  यही नहीं झाड़ू के साथ सेल्फी बनाकर भी लोग सोशल साइट्स पर डालने की होड़ लगाये हुए हैं किसी किसी पोस्ट में तो भाई लोग झाड़ू के साथ सेल्फी लगाकर यह भी पूछ रहे हैं कि कैसा लग रहा हूं. फिलहाल स्वच्छता अभियान का जमीनी नफा-नुकसान चाहे जो  निकले पर  इसमें कोई दो राय नहीं इस अभियान को नेतागीरी चमकाने के लिए लोग नायाब जरूर मान रहे हैं कहना न होगा स्वच्छता अभियान में बड़े बड़े राजनेताओं, फिल्मी सितारों, नामचीन खिलाडि़यों, चोटी के उद्योगपतियों, बाबाओं, साधू-संतों जैसे लोगों ने स्वच्छता अभियान में बढ-चढ कर  झाडू लगाई लेकिन दिल पर हाथ रखकर बताना क्या नामचीन लोगों की इस पहल के बावजूद कहीं  स्वच्छता भी नजर आयी.

15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक इस अभियान को गति दिए जाने के सरकारी फरमान दिए गए हैं इसके बाद से ही  विभागीय अधिकारी मातहतों को सफाई की घुट्टी पिलाते हुए बैठकें  भी ले रहें हैं. उन्हें सफाई के विभिन्न पहलुओं का ज्ञान भी परोसा जा रहा है किन्तु अभियान वहीं तक सिमटा हुआ हैं जहाँ की पत्रकार और छायाकार पहुँच रहें हैं ,फोटो छपे तो झाड़ू हाथ लेंगें वरना फोकट में झाड़ू पकड़ने वाले कम ही नज़र आ रहें हैं, अभियान में फोटो छपास का अंदाज़ा आप खुद  तस्वीरों को देखकर लगा सकतें हैं लकालक सफेद कुर्तों में कहीं कोई कूड़े के छिट्टे या आस पास कोई मक्खी तक दिख जाए तो बताइयेगा.झाडू को पकड़ने का तरीका, सफाई के लिए चयनित स्थान और कूड़े पर भी एक नजर जरूर डालें खुदबखुद  आपको इस अभियान में की  सच्चाई और अच्छाई नजर आ जायेगी————-

दरअसल सिस्टम में जो कमी है वो तो है ही हम ज्यादातर भारतवासी ऐसा मानते हैं कि हम खुद तो जरा भी गंदगी नहीं करते वो तो दूसरा कर जाता है ,जब की हम हमेसा  इस प्रयास में रहते हैं कि केवल हमारा घर-कमरा ही स्वच्छ.साफ रहे, चाहे अपना कचरा पड़ोसी के दरवाजे के आगे क्यों न बिखेरना पड़े दें। हम हमारे घर की सफाई देखकर यह अनुमान लगा लेते हैं कि न केवल पूरा भारत बल्कि पूरा विश्व साफ.सुथरा है। फिर हमें क्या जरूरत हैए सड़कों.चौराहों.गली.मोहल्लों में बिखरे कूड़े.करकट को साफ़ करने के ये कोई  हमारी ड्यूटी थोड़े न है ……..

अब देखिए न कल स्वच्छता अभियान के तहत हाथ में झाड़ू थामे सेल्फी को फेसबुक,ट्विटर पर डालकर जिन-जिन ने सफाई की थी आज उन्ही जगहों   पर गन्दगी  का गुबार हैं। अब उस जगह न कोई मंत्री हाथ में झाड़ू लिए नजर आ रहा है न मोहल्ले का सभासद क्यों कि उद्देश्य वास्तविक साफ सफाई का थोड़ी था  सब झाड़ू के साथ अपनी-अपनी तस्वीरें खिचवा कर इति श्री कर चुकें हैं, अखबारों में छपी अपनी तस्वीरों को देखकर काफी प्रसन्न भी हो चुकें हैं बस हो गया, जहाँ हमारे दिलो दिमाग में केवल इस तरह का दिखावा रचा बसा है वहां किसी अभियान के उद्देश्यों की पूर्ति मुस्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन ही है । स्वच्छता अभियान का हाल भी कुछ इसी तरह का हो चला है सड़क पर झाड़ू से सफाई करते हुए सेल्फी का फेसबुक या ट्विटर पर आना  हमारे सफाई-पसंद होने की सोशल  निशानी है। समाज और सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में  प्राथमिकताएं अब हकीकत से  नहीं बल्कि सेल्फी और अखबार की कतरनों  से तय होती हैं। सच्चाई तो यह है की यह अभियान सैल्फी अभियान और मीडिया में फोटो छपने तक ही सिमट कर रह गया है ! काश….स्वच्छता अभियान में हम सच्ची सहभागिता निभाते और ज्यादा नहीं पास –पड़ोस के ही वातावरण को बेहतर बना रहे होते तब भी अभी तक इस अभियान की सार्थकता काफी हद तक नज़र आ रही होती आइये अब से इस अभियान को हम आप भी सच्चे दिल से गति दें स्वच्छता हम सबके जीवन के लिए जरूरी है !




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