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Tuesday 18 September 2018
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कंगना ने ‘सिमरन’ बन लूटा अपने फैंस को

कंगना ने ‘सिमरन’ बन लूटा अपने फैंस को

नेशनल अवॉर्ड विनिंग निर्देशक हंसल मेहता और अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म ‘सिमरन’ काफी समय से सुर्खियों में है। चूंकि हंसल और कंगना, दोनों की इंडस्ट्री में एक अलग पहचान है, तो जाहिर है कि दर्शकों को इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं। रीयल लाइफ इंसीडेंट से इंस्पायर इस फिल्म को लेकर जितना बज़ था, पर्दे पर यह उतनी ही कमजोर साबित हुई है। दरअसल, निर्देशक ने फिल्म में एक कमजोर कहानी को अकेले कंगना के कंधों पर खींचने की कोशिश की है, जिसमें वह नाकाम दिखे हैं और फिल्म दर्शकों को निराश करती है।

स्क्रिप्ट
कहानी अमरीका में रहने वाली ३० वर्षीय डिवोर्सी लडक़ी प्रफुल्ल पटेल (कंगना) की है, जो पैरेंट्स के साथ रहती है और एक होटल में हाउसकीपिंग की जॉब करती है, लेकिन वह अपना घर लेना चाहती है। इधर, उसके पैरेंट्स चाहते हैं कि वह दोबारा शादी करके सैटल हो जाए। बिंदास और अपने हिसाब से लाइफ को जीने वाली प्रफुल्ल को जुआं खेलने की लत लग जाती है। वह शुरुआत में जीतने के बाद बहुत सारा धन हार जाती है और कैसीनो में ही कुछ लोगों से कर्ज भी ले लेती है। इसके बाद जब वो लोग प्रफुल्ल से अपना पैसा लौटाने का दबाव बनाते हैं, तो मजबूरन प्रफुल्ल एक अलग अंदाज में बैंक लूटने लगती है। फिर प्रफुल्ल की जिंदगी में आने वाले ट्विस्ट और टन्र्स के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

एक्टिंग
पूरी फिल्म कंगना पर टिकी है और उन्होंने अपने किरदार के डिफरेंट शेड्स बखूबी निभाए हैं, लेकिन उनके अलावा अन्य कोई जाना-पहचाना चेहरा न होने से बात नहीं बनती। कंगना के अपोजिट सोहम शाह का काम ठीक है। प्रफुल्ल के पैरेंट्स के रोल में किशोरी शहाणे और हितेन कुमार की परफॉर्मेंस ठीक-ठाक है। अन्य सपोर्टिंग कैरेक्टर सिर्फ चंद दृश्यों में नजर आते हैं।

डायरेक्शन
‘शाहिद’, ‘सिटीलाइट्स’, ‘अलीगढ़’ सरीखी फिल्में बनाने वाले हंसल ‘सिमरन’ के निर्देशन में वह धार नहीं ला पाए, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। स्टोरी और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ है, कहीं भी दर्शक फिल्म से कनेक्ट नहीं हो पाते। राइटिंग टीम में कंगना का भी नाम जुड़ा है, पर वह भी कुछ कमाल नहीं कर पाईं। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, पर एडिटिंग कमजोर है। गीत-संगीत भी एवरेज है।

क्यों देखें…
‘क्वीन’, ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से पलक झपकते फलक चुरा लेने वाली ‘सिमरन’ यानी मनचली व अल्हड़ कंगना की यह फिल्म दर्शकों को दीवाना बना पाएगी,यह फिलहाल मुश्किल नजर आता है। कंगना के नाम से अच्छी फिल्म होने की उम्मीद लेकर सिनेमाघरों का रुख करने वालों को ‘सिमरन’ दिल और दिमाग की उलझन में डाल देती है। ऐसे में यदि आप ‘क्वीन’ कंगना के डाय हार्ड फैन हैं, तो ही ‘सिमरन’ देखें, वर्ना ख्वाबों से भरा दिल कब टूट जाएगा पता भी नहीं चलेगा।



A group of people who Fight Against Corruption.


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