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Tuesday 20 November 2018
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चौंकाने वाला सर्वे, 97 फीसदी युवा नहीं जानते हिंदी दिवस

चौंकाने वाला सर्वे, 97 फीसदी युवा नहीं जानते हिंदी दिवस

जयपुर. किशोरों व युवाओं पर अंग्रेजी भाषा की खुमारी इस कदर बढ़ती जा रही हैं कि वे अपनी मातृभाषा को भूलने लगे हैं। हिंदी के स्थान पर हिंग्लिश (हिंदी में अंग्रेजी भाषा मिक्स) का प्रयोग बढ़ता जा रहा है।

हालत यह है कि शहर के 30 फीसदी युवाओं को मातृभाषा व 97 फीसदी युवाओं को हिंदी दिवस के बारे में जानकारी ही नहीं हैं। राजस्थान पत्रिका ने मालवीय नगर, राजापार्क, गांधीनगर सहित शहर के कई हिस्सों में 15-25 आयु वर्ग के 100 लड़के-लड़कियों पर सर्वे किया। सर्वे में हिंदी भाषा पर पांच सवाल किए। पचास फीसदी युवा हिंदी में सवाल सुनते ही रवाना हो गए।

हिंदी व अंग्रेजी में हो सरकारी कामकाज

सर्वे में अधिकांश युवाओं ने कहा कि सरकारी कामकाज हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होना चाहिए। वैश्वीकरण के दौर में केवल हिंदी जानने वाले युवा पिछड़ रहे हैं। मल्टीनेशनल कम्पनियों में भी काम हिंदी में ही किया जाता हैं। इसलिए समय की मांग के अनुसार माता-पिता बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में ही दाखिला दिलवा रहे हैं।

इसलिए आज मनाते हिंदी दिवस

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने काफी विचार-विमर्श के बाद संघ की राज भाषा हिंदी और लिपि देवनागरी का चुनाव किया।  इसलिए इस दिन ही हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। अंग्रेजी को द्वितीय भाषा माना गया।

किशोरों को हिंदी संबंधी जानकारी नहीं होने का सबसे बड़ा कारण हैं अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी भाषा विकल्प के तौर पर पढ़ाई जा रही है। वैकल्पिक शिक्षा में भी व्याकरण तौर पर ठीक से नहीं पढ़ाई जा रही। कुछ स्कूलों में हिंदी में संवाद पर प्रतिबंध है। साथ ही सोशल मीडिया पर हिंदी का ह्रास हो रहा है।  राजनैतिक इच्छाशक्ति व देश का आर्थिक विकास से हिंदी को बढ़ावा मिल पाएगा।

प्रो. विनोद शर्मा, हिंदी विभाग, राजस्थान विवि.

 



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