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Tuesday 18 September 2018
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जीवन की ऊंचाइयों को यू छुएँ

जीवन की ऊंचाइयों को यू छुएँ

जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुख को एक जैसा समझ कर, उसके बाद युद्ध के लिए तैयार हो जाना चाहिए। इस प्रकार युद्ध करने से हम पाप को नहीं प्राप्त होंगे।
जीवन एक युद्ध की तरह है, जिसको हमें लड़कर ऐसे जीतना होगा कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। जीवन में सुख-दुख, नफा-नुक्सान यह सब चलता रहेगा। इनसे हमें बचकर रहना है। अगर हम इनमें ही उलझ कर रह गए तो जीवन की ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सकते।
हार के साथ जीत, नुक्सान के साथ फायदा और सुख के साथ दुख ऐसे जुड़े हैं, जैसे सिक्के के दो पहलू। अगर इंसान को सुख की चाह है तो यह मान कर चलना चाहिए कि कल दुख भी आएगा। यदि हम आज जीत रहे हैं तो कल हार भी होगी।
हम चाहते हैं कि सब कुछ हमारी इच्छा के मुताबिक ही हो, जो मुमकिन नहीं है। जब इंसान यह समझ लेता है कि फायदा और हानि दोनों स्थितियों में एक जैसा रहना है और यह सब तो जीवन भर होता रहेगा। तब इन सब बातों का असर पडऩा भी उस पर बंद हो जाएगा।

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